श्री लक्ष्मी चालीसा | Shri Lakshmi Chalisa
॥ दोहा ॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास । मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस ॥ ॥ सोरठा॥ यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं । सब विधि करौ …
॥ दोहा ॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास । मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस ॥ ॥ सोरठा॥ यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं । सब विधि करौ …
॥ दोहा ॥ जय जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान । होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धी बल ज्ञान ॥ घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार । शीतल छइयां में झुलई, …
॥ दोहा ॥ जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि । बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि ॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु । दुष्जनों के पाप को, …
॥ चौपाई ॥ शीतल हैं शीतल वचन, चन्दन से अधिकाय ॥१॥ कल्प वृक्ष सम प्रभु चरण, हैं सबको सुखकाय ॥२॥ जय श्री शीतलनाथ गुणाकर, महिमा मंडित करुणासागर ॥३॥ भाद्दिलपुर के दृढरथ राय, …
॥ दोहा ॥ जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप । अमर उडेरो लाल जय, झुलेलाल अनूप ॥ ॥ चौपाई ॥ रतनलाल रतनाणी नंदन । जयति देवकी सुत जग वंदन ॥१॥ दरियाशाह …
॥ दोहा ॥ सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश । ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश ॥ करो कृपा करिवर वदन, जो सरशुती सहाय । चित्रगुप्त जस विमलयश, वंदन गुरूपद …
॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय । नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय ॥ जय जय रवि शशि सोम, बुध जय गुरु भृगु शनि राज । जयति राहु …
॥ दोहा ॥ कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अंग । पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग ॥ ॥ चौपाई ॥ जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर ॥१॥ भानु …
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल । दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज । करहु कृपा हे …
🌺 हनुमान चालीसा क्या है? “चालीसा” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के “चालीस” शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है – 40। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा में कुल 40 …